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निमांत के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का निधन, मोक्षदा एकादशी पर किया परमधाम का मार्गप्राप्त

निमांत के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा का निधन, मोक्षदा एकादशी पर किया परमधाम का मार्गप्राप्त
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प्रयागराज जिले के निमांत क्षेत्र के प्रख्यात संत सियाराम बाबा ने 11 दिसंबर 2024, बुधवार को मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती के शुभ अवसर पर अंतिम सांस ली। वह सुबह 06:10 बजे भट्टयान बज़ुर्ग स्थित अपने आश्रम में अपने जीवन की यात्रा को समाप्त करते हुए परमधाम की ओर प्रस्थान कर गए। संत सियाराम बाबा का निधन उनके भक्तों और अनुयायियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है।


संत सियाराम बाबा ने अपनी जीवनभर की साधना, ज्ञान और भक्ति से लाखों लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी थी। उनके आश्रम में नियमित रूप से भजन, कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते थे, जो न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए भी एक आध्यात्मिक केंद्र बन गए थे। उनका जीवन पवित्रता, साधना और समर्पण का प्रतीक था, और उनके उपदेशों ने समाज में कई सकारात्मक बदलावों की दिशा निर्धारित की थी।


मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती के पवित्र दिन संत सियाराम बाबा का देह त्याग करना उनकी आध्यात्मिक यात्रा की पूर्णता को दर्शाता है। मोक्षदा एकादशी का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है, क्योंकि यह दिन व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, गीता जयंती भी भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों का उत्सव है, जो जीवन के उद्देश्य और अध्यात्मिक ज्ञान की ओर मार्गदर्शन प्रदान करता है।


संत सियाराम बाबा के निधन से उनके अनुयायी शोक संतप्त हैं, लेकिन वे उनके उपदेशों और जीवन के मार्ग पर चलने का संकल्प ले रहे हैं। उनके आश्रम में आज भी श्रद्धालु उनके आशीर्वाद और उपदेशों को याद करते हैं, जो हमेशा उनके दिलों में जीवित रहेंगे।


संत सियाराम बाबा का निधन एक युग के समापन का प्रतीक है। उनका जीवन और उनके उपदेश सदैव लोगों के हृदयों में जीवित रहेंगे। मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती के दिन उनके द्वारा त्यागे गए शरीर ने न केवल उनके अनुयायियों को शोकित किया, बल्कि पूरे क्षेत्र को एक गहरी आध्यात्मिक विरासत प्रदान की है।


यह लेख/समाचार लोक मान्यताओं और जन स्तुतियों पर आधारित है। पब्लिक खबर इसमें दी गई जानकारी और तथ्यों की सत्यता या संपूर्णता की पुष्टि की नहीं करता है।

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